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सुरक्षा से खिलवाड़ और एक अदद तस्वीर

विदेशी शक्तियों ने प्रेरणा के लिए नेपाल और बांग्लादेश का उदाहरण इतिहास में दर्ज करवा दिया है। लगता है राजवंश ने इसी से प्रेरणा लेनी शुरू कर दी है। इसका पहला हिस्सा है सडक़ों पर भीड़। लोकतंत्र की जगह भीड़तंत्र। शायद बाबा साहिब अंबेडकर को इसका अंदाजा था। इसलिए उनका मानना था कि लोकतंत्र में भीड़तंत्र का कोई स्थान नहीं है। भीड़तंत्र केवल लोकतंत्र के लिए ही नहीं, बल्कि देश के लिए भी खतरा है…

दो दिन पहले कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े 84 साल के हो गए। सचमुच यह खुशी का मौका था। जीवन की इस चौथ में भी वे स्वस्थ और प्रसन्न रहें, यही सबकी कामना थी। स्वाभाविक है कांग्रेस जनों की तो यह कामना होगी ही। इस बढ़ती उम्र में भी वे चुनाव लड़ कर कांग्रेस के प्रधान बने थे। कांग्रेस के राज परिवार ने घोषणा कर दी थी कि पार्टी को अब युवा खून की जरूरत है, इसलिए जिम्मेदारियां युवा पीढ़ी को ही दी जाएंगी। इस धोखे में केरल के शशि थरूर भी फंस गए थे। यही कारण था कि वे कांग्रेस के अध्यक्ष बनने के लिए रिंग में कूद पड़े थे। लेकिन राज परिवार जानता था कि पार्टी को युवाओं की जरूरत पीछे चलने के लिए है। नेतृत्व तो अनुभवी आदमी ही कर सकता है। मल्लिकार्जुन खडग़े से बड़ी उम्र का शायद कोई अनुभवी व्यक्ति पार्टी के पास भी नहीं था। आखिर अनुभव काम आया और शशि थरूर को हरा कर मल्लिकार्जुन खडग़े पार्टी अध्यक्ष बन गए। उस समय लगता था कि राज परिवार ने गलत मोहरे पर दांव लगा दिया है। लेकिन वह दांव अब जाकर सीधा पड़ता दिखाई देने लगा है। जैसा कि पहले बताया गया है खडग़े जी का चौरासीवां जन्म दिन था। खडग़े जी जिस मकान में रहते हैं, वह मकान भारत के प्रधानमंत्री के आधिकारिक निवास से कुछ सौ मीटर की दूरी पर ही है।

इसलिए यह क्षेत्र सुरक्षा के लिहाज से सर्वाधिक संवेदनशील है। वैसे भी भारत के एक प्रधानमंत्री की विदेश में और दो की देश में ही हत्या हो चुकी है, इसलिए आज जिस प्रकार का वैश्विक वातावरण है, उसमें सर्वाधिक चौकन्ना रहने की जरूरत तो रहती ही है। लेकिन खडग़े जी के घर लोग बधाई देने आ रहे हैं तो पुलिस ने शायद ध्यान देने की ज्यादा जरूरत नहीं समझी। बुजुर्ग आदमी हैं, घर में जन्म दिन की खुशी है, लोगों का आना तो स्वाभाविक ही है। फिर कोई छोटे मोटे लोग तो आ नहीं रहे थे। राहुल गान्धी, जो भारत में विपक्षी नेता हैं, यानी प्रधानमंत्री के बाद नंबर दो पर हैं। उनकी बहन प्रियंका वाड्रा जो स्वयं भी सांसद हैं। कांग्रेस के कई दूसरे सांसद। आम तौर पर होता है कि जन्म दिन के अवसर पर बधाई देते हैं, फूल बगैरह दिए जाते हैं, केक काटा और खाया जाता है, मोमबत्तियां जलती और बुझती हैं, कुछ खा-पीकर बधाई देने वाले निकल लेते हैं। लेकिन खडग़े जी के घर में सांसद और कांग्रेस के दूसरे नेता आ तो रहे थे, परंतु वापस नहीं जा रहे थे। शायद पुलिस को तब भी शक नहीं हुआ कि खडग़े जी के घर में जन्म दिन मनाने के बहाने दाल में कुछ काला पक रहा था। यह काला प्रधानमंत्री निवास की सुरक्षा व्यवस्था को भेदना ही था। कानून के अनुसार इस क्षेत्र में भीड़ जमा नहीं हो सकती। लेकिन देखते देखते खडग़े जी के घर से निकल कर लोग अपने घरों को जाने की बजाय प्रधानमंत्री के घर की ओर चल पड़े। जब तक पुलिस कुछ समझ पाती या उसे पता चलता, तब तक प्रधानमंत्री के निवास के एक दरवाजे के बाहर भीड़ जमा हो गई। अलबत्ता राहुल गान्धी ने प्रधानमंत्री आवास को घेरने से पहले सोशल मीडिया में चेतावनी दी, ‘प्रधानमंत्री मोदी को लगता है कि वो बिना जवाब दिए, बिना किसी नतीजे का सामना किए बच निकलेंगे, नहीं कर पाएंगे, इस बार तो बिल्कुल नहीं।’ इसके साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि वे प्रधानमंत्री आवास के बाहर पहुंचें। कानून के अनुसार यहां भीड़ इक_ा नहीं हो सकती। लेकिन भीड़ तो इक_ा हो चुकी थी। भीड़ में कुछ जाने पहचाने चेहरे भी थे।

भीड़ में राहुल गान्धी थे। वे कह रहे थे कि वे शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेने आए हैं। उनकी बहन प्रियंका वाड्रा भी थीं। वे तालियां बजा रही थीं। पुलिस ने समझाया भी कि इस जगह भीड़ इक_ा होने से सुरक्षा में चूक हो सकती है। देशद्रोही लोग इसका लाभ उठा सकते हैं। लेकिन इसकी चिन्ता वहां किसी को नहीं थी। राहुल गान्धी सभी को प्लास्टिक के छल्ले बांट रहे थे और सभी को कह रहे थे कि इसे बांध लो ताकि दूर से लगे कि हाथों में हथकड़ी लगाई हुई है। खडग़े साहिब भी उस छल्ले को बांधकर बार बार हाथ ऊपर को कर रहे थे ताकि ऐसा लगे जैसे जन्म दिन के अवसर पर उन्हें हथकड़ी पहना दी हो। राहुल गान्धी इतना तो जानते ही होंगे कि जब भीड़ जुड़ती है तो कई बार साजिश रचने वाले भी चुपचाप उस भीड़ का हिस्सा बन जाते हैं। राजीव गान्धी की हत्या करने वाले भी उस भीड़ का हिस्सा बन कर आए थे जो उनका स्वागत करने के लिए इकट्ठा हुई थी। प्रधानमंत्री के घर के बाहर राहुल गान्धी तो जिस भीड़ को बुला रहे थे, वह उनकी कब्र खोदने का नारा लगाने वालों की भीड़ थी। इसमें असामाजिक तत्वों का घुस जाना बहुत आसान था। लेकिन राहुल गान्धी को इन सब बातों की कोई चिन्ता नहीं थी। उनको तो किसी भी तरीके से मोदी को हटाना था। स्थिति की गम्भीरता को देखते हुए केन्द्रीय मंत्री डा. जितेन्द्र सिंह राहुल गान्धी से बातचीत करने आए। राहुल गान्धी ने बता दिया कि यदि मुझे आश्वासन मिल जाए कि लोकसभा में नीट पर चर्चा होगी तो हम यहां से हट जाएंगे। जितेन्द्र सिंह ने इसका विश्वास दिलाया। सभी ने सोचा कि अब राहुल गान्धी अपनी भीड़ को लेकर वहां से चले जाएंगे। लेकिन राहुल गान्धी और प्रियंका वाड्रा अपनी भीड़ को लेकर वहां से हटे नहीं। लोगों ने समझाया भी लेकिन वे कहते रहे लोकतंत्र में मेरा अधिकार है, मैं जहां चाहूं, बैठूं, लेटूं या तालियां बजाऊं। सचमुच ही वे जमीन पर लेट गए। पुलिस उनको उठने के लिए प्रार्थना कर रही है, लेकिन वे सपाट लेटे हुए हैं। कभी टांगें पसारते हैं और कभी सिकोड़ते हैं। वे कुछ दिन पहले ही विदेश यात्रा से लौटे हैं। उनकी यह कलाबाजियां हैरान कर रही हैं।

जंतर मंतर पर अमरीका से आए अभिजीत दीपके मोर्चा लगा कर बैठे हैं। इधर विदेश से लौटे कर राहुल गान्धी प्रधानमंत्री का घर घेरकर बैठे हैं। उदाहरण नेपाल का दिया जा रहा है। पुलिस ने चार घंटे की मशक्कत के बाद प्रधानमंत्री निवास के बाहर की इस गैर कानूनी भीड़ को हटाया। लेकिन एक बात स्पष्ट हो रही है। लम्बे अरसे से राजवंश सत्ता से बाहर हो गया है। सत्ता में वापस आने का एक ही रास्ता है कि राजवंश पोलिंग बूथों के आगे मतदाताओं की भीड़ जुटाए और उनका समर्थन प्राप्त करे। लगता है राजवंश समझ गया है कि निकट भविष्य में यह सम्भव नहीं है। राजकुमार की उम्र भी साठ का स्पर्श करने वाली है। फिर भारत की सत्ता पर कब्जा करने का दूसरा रास्ता क्या है? विदेशी शक्तियों ने प्रेरणा के लिए नेपाल और बांग्लादेश का उदाहरण इतिहास में दर्ज करवा दिया है। लगता है राजवंश ने इसी से प्रेरणा लेनी शुरू कर दी है। इसका पहला हिस्सा है सडक़ों पर भीड़। लोकतंत्र की जगह भीड़तंत्र। शायद बाबा साहिब अंबेडकर को इसका अंदाजा था। इसलिए उनका मानना था कि लोकतंत्र में भीड़तंत्र का कोई स्थान नहीं है। भीड़तंत्र केवल लोकतंत्र के लिए ही नहीं, बल्कि देश के लिए भी खतरा है। सरकार को इस बात की जांच करवानी चाहिए कि जंतर मंतर और प्रधानमंत्री निवास के बाहर सडक़ पर पसरे व्यक्ति के पीछे भीड़तंत्र को कौन संचालित कर रहा है? बाकी जहां तक राहुल गान्धी का सवाल है, उसे वह एक अदद तस्वीर मिल गई है जिसकी राजपरिवार को सबसे ज्यादा जरूरत थी। सडक़ पर पसरे राहुल गान्धी। जोर जबरदस्ती उसे उठाते पुलिस कर्मी। राजकुमार का घायल हो जाना। देश की जनता के लिए इतना कष्टपूर्ण संघर्ष करता राज परिवार।-कुलदीप चंद अग्निहोत्री

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