शिंदे को राहत, उद्धव ठाकरे को झटका, सुप्रीम कोर्ट ने UBT के 6 सांसदों के विलय पर नहीं लगाई रोक,आगे क्या

मुंबई/नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) यानी शिवसेना UBT के सांसद अरविंद गणपत सावंत की उस याचिका पर सुनवाई दो सप्ताह के लिए टाल दी, जिसमें लोकसभा स्पीकर द्वारा UBT के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मंजूरी देने के फैसले को चुनौती दी गई है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने यह कहते हुए सुनवाई स्थगित की कि लोकसभा स्पीकर की ओर से कोई पेश नहीं हुआ।
कोर्ट ने 22 जुलाई को मामले में प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया था। सोमवार को शिंदे गुट के कुछ विधायकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल और सिद्धार्थ भटनागर पेश हुए, लेकिन लोकसभा स्पीकर की ओर से कोई उपस्थित नहीं था। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि मामले में तत्काल अंतरिम राहत देने की जरूरत है। हालांकि, बेंच ने कहा कि अंतरिम राहत पर फैसला लेने से पहले प्रतिवादियों को जवाब देने का उचित अवसर दिया जाएगा।
‘स्पीकर के पास विलय मंजूर करने की शक्ति नहीं’
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने आरोप लगाया कि प्रतिवादियों की कोशिश संसद के मौजूदा मानसून सत्र के खत्म होने तक मामले को टालने की है। कपिल सिब्बल ने दलील दी कि जब सांसदों के खिलाफ संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत कोई अयोग्यता याचिका ही लंबित नहीं थी, तब लोकसभा स्पीकर के पास विलय को मंजूरी देने का अधिकार नहीं था। उन्होंने कहा कि दसवीं अनुसूची के पैराग्राफ 4 के तहत स्पीकर की भूमिका किसी अयोग्यता याचिका के संदर्भ में ही सामने आती है।
UBT को नहीं दिया सुनवाई का मौका
सिब्बल के मुताबिक, स्पीकर इस प्रावधान के तहत किसी आवेदन के बचाव में ही विलय के मुद्दे पर निर्णय कर सकते हैं और उनके पास कोई व्यापक या ‘प्लेनरी’ अधिकार नहीं है। सिब्बल ने यह भी आरोप लगाया कि स्पीकर ने UBT गुट को सुनवाई का कोई अवसर नहीं दिया। हालांकि, बेंच ने ध्यान दिलाया कि लोकसभा स्पीकर और लोकसभा के संयुक्त सचिव की ओर से अभी कोई पेश नहीं हुआ है। सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि दोनों को नोटिस की तामील हो चुकी है।
22 जुलाई को अंतरिम रोक से किया था इनकार
इस मामले की पिछली सुनवाई 22 जुलाई को हुई थी। तब सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा स्पीकर को नोटिस जारी किया था, लेकिन विलय के फैसले पर तत्काल अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था। रिपोर्टों के मुताबिक, संसद के मानसून सत्र से पहले लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने शिवसेना UBT के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मंजूरी दी थी।




