महाराष्ट्र

‘मंत्री बाद में पहले हमारे रिश्तेदार’, संजय शिरसाट से मुलाकात के बाद बोले अभिजीत दीपके के पिता

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के पिता भगवान शंकर दीपके से मिलने महाराष्ट्र सरकार के मंत्री संजय शिरसाट उनके घर पहुंचे. मुलाकात के बाद भगवान शंकर दीपे ने कहा कि शिरसाट उनके लिए पहले रिश्तेदार हैं, मंत्री बाद में. उन्होंने बताया कि जांच के दौरान शिरसाट ने जानबूझकर उनसे दूरी बनाए रखी ताकि किसी तरह का गलत संदेश न जाए. अब घर आकर उन्होंने अपने मन का बोझ हल्का किया, जिससे उन्हें भी काफी सुकून मिला.

भगवान शंकर दीपे ने कहा, “यह हमारे लिए मंत्री बाद में हैं, पहले हमारे रिश्तेदार थे. तो मैं यही सोच रहा था कि सर फोन क्यों नहीं कर रहे? घर पर क्यों नहीं आ रहे? लेकिन उनकी जो सोच है, उस पर मुझे गर्व है. उन्होंने कहा कि अगर मैं बीच में आपको फोन करता या आपसे मिलने आता, तो दूसरे लोग उसका गलत मतलब निकालते.”

उन्होंने आगे कहा, “देखिए, उनके दिल में मिलने की इच्छा होने के बावजूद भी, सब लोगों का ध्यान रखते हुए वे मुझसे मिलने नहीं आए. लेकिन उनके दिल में भी यह जरूर रहा होगा कि मैं इतना करीब होने के बावजूद उनसे मिल नहीं सकता, उन्हें फोन तक नहीं कर सकता. इस बात का उन्हें भी कितना दर्द हुआ होगा. आज वे अपना दिल हल्का करने के लिए हमारे घर आए हैं. उनके आने से मुझे बहुत अच्छा लगा.”

‘मैंने किसी को फोन नहीं किया’

भगवान शंकर दीपे ने बताया कि पूरे घटनाक्रम के दौरान उन्होंने किसी को फोन नहीं किया. उन्होंने कहा, “मैं तो पूरे समय सिर्फ WhatsApp पर ही बात कर रहा था. मैंने न लैंडलाइन से और न ही मोबाइल से किसी को फोन किया, क्योंकि बहुत लोगों ने ऐसा करने से मना किया था. IG साहब ने भी कहा था कि थोड़ा संभलकर रहो. पुलिस अधिकारियों ने भी यही सलाह दी थी. इसलिए मैं ज्यादा किसी से बात नहीं करता था.”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने खुद मंत्री संजय शिरसाट से भी संपर्क नहीं किया. उनके मुताबिक, “साहब को भी मैंने फोन नहीं किया. मैंने किसी को भी फोन नहीं किया. लेकिन मेरे मन में यह बात जरूर आती थी कि दूसरे लोग मुझे फोन कर रहे हैं, आकर मिल रहे हैं, तो मेरे इतने नजदीक होकर भी ये क्यों नहीं मिल रहे. यह बात मेरे दिल में थी. मुझे लगता है कि इस बात की तकलीफ उनके दिल में भी रही होगी. इसलिए आज जब वे मेरे घर आए, तो मुझे बहुत अच्छा लगा.”

15 साल से साथ काम किया- दीपके के पिता

अपने रिश्ते का जिक्र करते हुए भगवान शंकर दीपे ने कहा, “मंत्री बाद में हैं, हमारे लिए पहले हमारे रिश्तेदार हैं और हमें गर्व है कि हमारे रिश्तेदार इतनी ऊंचाई पर पहुंचे हैं. मैं साहब को आज से नहीं जानता. मैंने उनके मतदाता संघ में 15 साल तक काम किया है. बजाज नगर, जो साहब का गढ़ माना जाता है, वहां से उन्हें सबसे ज्यादा बहुमत मिलता है और वहां मेरे नाम से भी लोग मुझे जानते हैं.”

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