विरार-अलीबाग कॉरिडोर का रास्ता साफ, डहाणू की 30 हेक्टेयर सरकारी जमीन वन विभाग को मिलेगी

मुंबई: महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल (एमएसआरडीसी) के बहुप्रतीक्षित विरार-अलीबाग मल्टी मॉडल कॉरिडोर परियोजना को बड़ी राहत मिली है। परियोजना के लिए आवश्यक वन भूमि की मंजूरी का रास्ता साफ करने के उद्देश्य से पालघर जिले के डहाणू तहसील स्थित चंडीगांव की 30 हेक्टेयर सरकारी भूमि वन विभाग को देने की मंजूरी राजस्व विभाग ने दे दी है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की पहल पर मंत्रालय स्तर पर यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है।
परियोजना को ‘अत्यावश्यक सार्वजनिक परियोजना’ का दर्जा
राज्य सरकार ने इस परियोजना को ‘अत्यावश्यक सार्वजनिक परियोजना’ का दर्जा भी दिया है। यह कॉरिडोर पालघर जिले के नवघर (वसई) से रायगढ़ जिले के चिरनेर (उरण) तक लगभग 80 किलोमीटर लंबा होगा। परियोजना के लिए वन भूमि का उपयोग आवश्यक होने के कारण वन विभाग को बदले में वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराना अनिवार्य था। इसी के तहत चंडीगांव में से 30 हेक्टेयर भूमि वनीकरण के लिए वन विभाग को दी जाएगी।
निर्माण कार्य में तेजी आने की उम्मीद
सरकार ने यह भूमि एमएसआरडीसी को भोगवटादार वर्ग-2 के रूप में मात्र 1 रुपये प्रति वर्गमीटर की नाममात्र दर पर देने का निर्णय लिया है। कोकण विभागीय आयुक्त और पालघर के जिलाधिकारी की ओर से इस साल की शुरुआत में प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर यह मंजूरी दी गई है। इससे परियोजना की वन स्वीकृति में सबसे बड़ी बाधा दूर हो गई है और निर्माण कार्य में तेजी आने की उम्मीद है।
परियोजना से क्या होगा फायदा?
यह महत्वाकांक्षी परियोजना पालघर और रायगढ़ जिलों को सीधे जोड़ने के साथ-साथ मुंबई महानगर क्षेत्र में यातायात का दबाव कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसके अलावा दोनों जिलों के बीच यात्रा का समय घटेगा और परिवहन व्यवस्था अधिक सुगम होगी।
भूमि हस्तांतरण के साथ कई शर्तें भी लागू
सरकार ने भूमि हस्तांतरण के साथ कई शर्तें भी लागू की हैं। एमएसआरडीसी को तीन महीने के भीतर यह 30 हेक्टेयर भूमि वन विभाग को सौंपनी होगी। भूमि का उपयोग केवल स्वीकृत उद्देश्य के लिए किया जा सकेगा। यदि परियोजना बंद होती है तो भूमि बिना किसी मुआवजे के सरकार को वापस करनी होगी। सरकार की अनुमति के बिना भूमि का हस्तांतरण, गिरवी रखना या अन्य किसी उद्देश्य से उपयोग नहीं किया जा सकेगा। भविष्य में भूमि पर किसी भी प्रकार के अतिक्रमण को हटाने की जिम्मेदारी वन विभाग की होगी।




