अंबानी की रिलायंस जियो को मिली बहुत बड़ी जीत, ₹11003 करोड़ का टैक्स डिसअलाउंस रद्द; अधिकारियों की दो अपील खारिज

नई दिल्ली। इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) ने रिलायंस जियो इन्फोकॉम पर 11,003 करोड़ रुपये के टैक्स डिसअलाउंस (टैक्स छूट न मिलने) के फैसले को रद्द कर दिया है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि कंपनी की बुक्स में खर्च को ‘कैपिटल वर्क-इन-प्रोग्रेस’ (CWIP) के तहत कैपिटलाइज करने का मतलब यह नहीं है कि टैक्स के मकसद से वह खर्च कैपिटल है या रेवेन्यू।
मुंबई ट्रिब्यूनल की बेंच, जिसमें ज्यूडिशियल मेंबर अमित शुक्ला और अकाउंटेंट मेंबर अरुण खोडपिया शामिल रहे, ने टैक्स अधिकारियों द्वारा असेसमेंट ईयर (AY) 2019-20 के लिए दायर दो अपीलों को खारिज कर दिया। ये मुकेश अंबानी की कंपनी के लिए काफी राहत की खबर है।
क्या थीं वे दो अपील?
पहली अपील उस ऑपरेशनल खर्च से जुड़ी थी, जिसे जियो ने अपने फाइनेंशियल स्टेटमेंट में कैपिटलाइज किया था, लेकिन टैक्सेबल इनकम की गणना करते समय उसे रेवेन्यू खर्च के तौर पर दिखाया था।
₹11,003 करोड़ की विवादित रकम में इंटरकनेक्ट चार्ज, कर्मचारियों का खर्च, प्रोफेशनल फीस, कॉल-सेंटर का खर्च, बिजली और ईंधन, मरम्मत और रखरखाव, नेटवर्क चलाने का खर्च, ब्याज, बिक्री और डिटेल आदि का खर्च शामिल रहे।
इस खर्च पर था विवाद
ट्रिब्यूनल ने पाया कि जियो ने टेलीकॉम नेटवर्क एसेट्स (जैसे एंटीना, रेडियो इक्विपमेंट, डक्ट, फाइबर, राउटर, रैक, बैटरी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट) को खरीदने और बनाने पर हुए खर्च को अलग से कैपिटलाइज किया था।
इसलिए, विवाद उन एसेट्स के कैपिटलाइजेशन को लेकर नहीं था, बल्कि कंपनी की अकाउंटिंग पॉलिसी के तहत CWIP में बांटे गए इनडायरेक्ट और बार-बार होने वाले ऑपरेशनल खर्च को लेकर था।
असेसिंग ऑफिसर का तर्क क्या था?
असेसिंग ऑफिसर का मानना था कि Jio अपने अकाउंट्स में खर्च को कैपिटल (पूंजीगत) और टैक्स के मकसद से रेवेन्यू नहीं मान सकती। उन्होंने कहा कि ये खर्च टेलीकॉम नेटवर्क को बेहतर और अपग्रेड करने से जुड़े थे, इसलिए टैक्स के मकसद से इन्हें कैपिटलाइज किया जाना चाहिए और सेक्शन 32 के तहत डेप्रिसिएशन की छूट मिलनी चाहिए।
इस तरह, पूरे ₹11,003 करोड़ को नामंजूर कर दिया गया। हालांकि, CIT(A) ने इस एडिशन को हटा दिया और कहा कि ये खर्च उन एसेट्स से जुड़े थे जो पहले ही इंस्टॉल और इस्तेमाल किए जा चुके थे, और इनसे कोई नई लंबे समय तक चलने वाली एसेट नहीं बनी थी।




