अंतर्राष्ट्रीय

अमेरिकी नाकाबंदी से थम गई तेहरान की आर्थिक नब्ज, गोली चलाए बिना ईरान को घुटनों पर लाने की रणनीति

होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी सेंट्रल कमांड की नौसैनिक नाकाबंदी का असर अब दिखाई देने लगा है। अमेरिका ने ईरान का तेल व्यापार बाधित करने के लिए यह नाकाबंदी की है। पिछले कई घंटों से ईरान के किसी भी जहाज को यहां से गुजरने की इजाजत नहीं मिली और कई तेल टैंकरों को बीच समुद्र से ही वापस लौटना पड़ा।

अमेरिकी नौसेना सक्रिय रूप से जहाजों की निगरानी कर रही है। ईरान से जुड़े टैंकरों को रोककर वापस भेजा जा रहा है। इसके चलते ईरान से तेल ले जाने वाले जहाजों की आवाजाही ठप हो गई है। हालांकि कुछ गैर-ईरानी जहाजों की सीमित आवाजाही जारी है। यूएसएस त्रिपोली के नेतृत्व में अमेरिकी नौसैनिक बेड़ा होर्मुज के मुहाने पर तैनात हैं। ओमान या यूएई जैसे देशों के जहाजों को रास्ता दिया जा रहा है, लेकिन ईरान से जुड़े कार्गो को वापस लौटाया जा रहा है। नाकाबंदी का सीधा लक्ष्य ईरान के अरबों डॉलर के आर्थिक लेनदेन को पूरी तरह ठप करना है। ईरान की 90 प्रतिशत अर्थव्यवस्था समुद्री तेल निर्यात और व्यापार पर टिकी है। अमेरिका की नाकाबंदी उसकी आर्थिक नब्ज दबाने जैसी है। यदि यह गतिरोध जारी रहा, तो ईरान को अपने तेल कुओं को बंद करना पड़ सकता है, क्योंकि उसकी भंडारण क्षमता अपनी सीमा तक पहुंच रही है।

खाड़ी देशों के जहाजों पर हमले कर सकता है ईरान  
रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल जीडी बख्शी ने अमर उजाला से कहा कि मुमकिन है ईरान खाड़ी देशों के उन जहाजों पर हमले शुरू कर दे, जिन्हें गुजरने की इजाजत दी जा रही है। पूर्व नौसेना अधिकारी कोमोडोर अनिल जय सिंह ने कहा कि नाकाबंदी युद्ध के समान है। अभी किसी बड़े देश ने अमेरिका के कदम पर आपत्ति नहीं जताई है, क्योंकि अभी उनके पास तेल का भंडार है।

अगले कुछ घंटे अहम: ताजा हालात में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। अमेरिका का ईरान पर यह दबाव बातचीत का नया रास्ता खोलेगा या सीधे सैन्य संघर्ष का, इसका फैसला अगले कुछ घंटों में होने की संभावना है। मौजूदा हालात में ईरान की ओर से लाल सागर में जवाबी कार्रवाई की धमकी दी गई है। यह स्थिति वैश्विक सप्लाई चेन के लिए विनाशकारी हो सकती है।

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा है कि जब तक समुद्र में नाकाबंदी जारी है, किसी संघर्ष विराम का कोई व्यावहारिक अर्थ नहीं है। तेहरान का तर्क है कि नाकाबंदी खुद एक युद्ध की कार्रवाई है।


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