अंधविश्वास की जड़ों तक पहुंचे बिना नहीं रुकेगी जादू-टोने के भ्रम वाली हिंसा

जिस दौर में देश की अर्थव्यवस्था की चमकती तस्वीर दुनिया के सामने पेश की जा रही हो, उसी बीच आए दिन जब महज अंधविश्वास की वजह से निर्दोष लोगों की हत्या की घटनाएं भी हो रही हों, तो यह अपने आप में विकास की मौजूदा परिभाषा पर एक सवालिया निशान है।
कुछ दिन पहले ओड़िशा के संबलपुर जिले में साठ साल की एक महिला और उसकी बेटी की सिर्फ इसलिए कुल्हाड़ी से हत्या कर दी गई कि उन पर कुछ लोगों को जादू-टोना करने का संदेह था। यह कोई पहली या अकेली घटना नहीं है, जिसमें सिर्फ अंधविश्वास के कारण निर्दोष महिलाओं की हत्या कर दी गई।
झारखंड और ओड़िशा सहित देश के अन्य इलाकों से भी डायन या जादू-टोना के अंधविश्वास की वजह से आदिवासी या कमजोर तबकों की महिलाओं को यातना देने से लेकर उनकी हत्या कर देने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। सरकारें मौजूदा कानूनी प्रक्रिया के तहत हत्या के आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करती हैं, लेकिन उसका असर इतना नगण्य है कि कुछ दिनों बाद फिर डायन या जादू-टोना के नाम पर हत्या की कोई अन्य घटना सामने आ जाती है।
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यह सोचने की जरूरत है कि विकास के दावों के बीच अंधविश्वास की जड़ें इतनी गहरी क्यों हैं। विकास की चकाचौंध के पीछे भारतीय समाज की इस स्याह तस्वीर को हम क्यों नहीं देख पा रहे हैं। एक तरफ हम आधुनिकता के दंभ में जीते हैं, तो दूसरी तरफ समाज का एक वर्ग ऐसा भी है, जिसमें मनुष्यता का बोध नहीं।
वह बेगुनाह लोगों की हत्या होते देखता है। दूसरी ओर, यह समझना मुश्किल है कि देश के दूरदराज इलाकों में सरकारें आधुनिक तकनीकी संसाधन और सुविधाएं पहुंचाने में कोई कोताही नहीं करतीं, लेकिन लोगों के बीच ऐसी सामान्य चेतना और समझ का विस्तार नहीं कर पातीं कि जादू-टोना और डायन जैसी धारणाएं महज अंधविश्वास हैं और यह किसी भी समाज के पिछड़े रह जाने के सबसे बड़े कारकों में से एक हैं।
विडंबना यह है कि ऐसी घटनाओं को सामान्य आपराधिक घटनाओं की तरह देखा जाता है और उसके पीछे सामाजिक जड़ता और मनोवैज्ञानिक जटिलताओं को समझने और उसी मुताबिक उसका दूरगामी हल निकालने की कोशिश नहीं की जाती।
आज के वैज्ञानिक दौर में भी समाज में अंधविश्वास की जड़ें इतने गहरे तक फैली हुई हैं कि कई बार लोग अपनी जान तक जोखिम में डाल देते हैं। कर्म और तर्क के सिद्धांत को कोने में रखकर कुछ लोग तंत्र-मंत्र और जादू-टोना का सहारा लेते हैं, जिसके अक्सर भयावह परिणाम सामने आते हैं। कभी तांत्रिक अनुष्ठान में किसी व्यक्ति की हत्या कर दी जाती है, तो कभी डायन कहकर सार्वजनिक तौर पर प्रताड़ना की हदें पार कर दी जाती हैं।




