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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री का भविष्य…

तमिलनाडु के नए युवा लोकप्रिय मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने शपथ ग्रहण करते ही 3 अहम आदेशों पर हस्ताक्षर किए, जिनमें 2 प्रमुख थे। एक, नशीली दवाओं की रोकथाम के लिए कड़े कदम उठाना और दूसरा, महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुलिस और प्रशासन को मुस्तैद करना। पर जिन कारणों से विजय की ओर सबका ध्यान गया है, वह है उनकी सादगी, सहृदयता और धर्मनिरपेक्षता। विजय के पिता ईसाई हैं और मां सनातनी हिंदू। इसलिए विजय दोनों धर्मों में आस्था रखते हैं और दोनों के धार्मिक कृत्यों में श्रद्धा से भाग लेते हैं। उनका यही रवैया अन्य धर्मों के प्रति भी है।

विजय तमिलनाडु के सुपर स्टार हैं और 600 करोड़ से अधिक की अर्जित संपत्ति के मालिक हैं। इसलिए माना जा सकता है कि राजनीति में उनका प्रवेश धन या यश कमाने के लिए नहीं हुआ। वह कुछ नया कर गुजरना चाहते हैं। उन्होंने तमिलनाडु में नेताओं के कटआऊट और पोस्टर लगाने को प्रतिबंधित कर दिया है। जबकि हर दल के नेता अपने फोटो के विज्ञापनों और कटआऊटों पर देश की गरीब जनता के अरबों रुपए बर्बाद करते हैं। जिन पाठकों ने तमिलनाडु का दौरा किया है, उन्होंने यह आश्चर्यजनक संस्कृति वहां देखी होगी कि राजनेताओं के 100-100 फुट ऊंचे कटआऊट जगह-जगह लगे होते हैं। 

विजय राजनीति से वी.आई.पी. संस्कृति समाप्त करना चाहते हैं और इस दिशा में भी उन्होंने कई पहलें की हैं, जिसका अच्छा संदेश गया है। इतने सम्पन्न और सुप्रसिद्ध व्यक्ति होते हुए विजय एक कर्मचारी की तरह समय पर दफ्तर आते और अपना लंच बॉक्स साथ लाते हैं। दोपहर को वह अपनी मेज पर डिब्बा खोल कर अकेले लंच करते हैं, कोई तामझाम नहीं। ऐसी छोटी-छोटी बातों का जनता पर बहुत अच्छा असर पड़ रहा है। दरअसल आम जनता की सरकार से अपेक्षाएं बहुत सीमित होती हैं। मसलन बिजली-पानी की आपूर्ति गड्ढा-मुक्त सड़कें, नागरिक सुविधाएं प्रदान करने वाली एजैंसियों में आम जनता के प्रति जिम्मेदारी और सम्मान का भाव आदि। विजय ने सख्त आदेश दिए हैं कि नागरिकों की ऐसी छोटी-छोटी समस्याओं का हल 24 घंटों के भीतर हो जाना चाहिए।

आज के राजनीतिक माहौल में जब अपने विपक्षी दलों के नेताओं को अपमानित करना, उनके प्रति अपशब्द बोलना और उनके परिवार पर छींटाकशी करना आम बात हो गई है, वहां विजय ने अपने व्यवहार से एक शुभ संकेत दिया है। मुख्यमंत्री का पद संभालते ही वे विपक्षी दलों के सभी बड़े नेताओं के घर अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने गए थे। इसे तमिलनाडु की राजनीति में एक अनूठी पहल माना गया है। छोटे दलों के कुछ नेताओं का तो यह कहना था, कि उनके जीवन में पहली बार कोई मुख्यमंत्री उनके आवास पर इस तरह शिष्टाचार प्रदॢशत करने आया।  आज के दौर में जब धर्मांध लोग एक-दूसरे के धर्मस्थलों को अपमानित या ध्वस्त करना अपनी उपलब्धि मानते हैं, उस दौर में विजय ने एक नई पहल की है। उन्होंने सभी धर्मों के उपेक्षित पड़े धर्मस्थलों का सरकारी प्रयास से जीर्णोद्धार कराए जाने की इच्छा व्यक्त की है। इस दिशा में वह कितने सफल हो पाएंगे, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, पर भारत के लोकतंत्र के लिए यह एक शुभ संकेत है। 

हम यहां उत्साह के अतिरेक में बह कर कल्पना लोक में नहीं जीना चाहते। हमें धरातल पर खड़े हो कर मुख्यमंत्री विजय का निष्पक्ष मूल्यांकन करते रहना होगा। अब इसे देश का दुर्भाग्य कहें या राजनीति का यथार्थ, कि सत्ता पाकर हर व्यक्ति बदल जाता है या हालात उसे बदलने के लिए मजबूर कर देते हैं। मेरा मानना है कि जिनमें आध्यात्मिक चेतना और नैतिक बल होता है, वही राजनीति की दलदल में कमल की तरह खिल पाते हैं। पर ऐसा यदा-कदा ही होता है। मुझे याद है किस तरह वाजपेयी जी की सरकार में जगमोहन जी के मंत्रालय 3 बार बदल दिए गए। वे कर्मठ व्यक्ति थे और पारदॢशता के साथ सुधार करना चाहते थे। पर जिस मंत्रालय में भी वह सुधार के प्रयास करते, उन्हें वहां से हटा दिया जाता था। यही रवैया अन्य दलों के सत्ता में आने के बाद देखा जाता है कि योग्य और भले लोगों को दरकिनार कर दिया जाता है, क्योंकि वे अपने राजनीतिक आकाओं की अनैतिक आकांक्षाओं को पूरा करने में सहयोग नहीं करते। 

विजय की एक और सीमा है कि उनका दल पूर्ण बहुमत प्राप्त नहीं कर सका। ऐसे में उन्हें अन्य दलों का सहारा लेना पड़ा है। अब ये दल कब तक उनका साथ दे पाएंगे इस पर सबकी नजर रहेगी। उनकी एक और सीमा यह भी है कि वे उस आॢथक-राजनीतिक गठजोड़ की संस्कृति में क्रांतिकारी परिवर्तन लाना चाहते हैं, जो गठजोड़ इतना सशक्त होता है कि जो इसकी नहीं सुनता, उसे विफल करने में यह कोई कसर नहीं छोड़ता। इसलिए विजय की राह आसान नहीं होगी। पर सिंगापुर जैसे गांव को अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में विकसित देश बनाने वाले ली क्वान का उदाहरण आशा की किरण दिखाता है, जो नगरपालिका के क्लर्क से उठ कर राष्ट्रपति बने और अपने ईमानदार, सादगीपूर्ण और फौलादी इरादों से सिंगापुर को अग्रणी राष्ट्र बना दिया। देशवासियों की विजय को यह शुभकामना रहेगी कि वे सफल हों, चिरायु हों और भारत की राजनीति में अपने आचरण और उपलब्धियों से नए मानदंड स्थापित करें।-विनीत नारायण

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