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‘डिजिटल इंडिया’ : दिक्कत कहां है?

डिजिटल इंडिया अभियान की शुरुआत के समय सरकार ने वादा किया था कि प्रौद्योगिकी हर नागरिक के जीवन को आसान बना देगी। आधार, यू.पी.आई., ई-गवर्नैंस पोर्टल, ऑनलाइन टैक्स फाइलिंग और शिकायत निवारण प्रणालियां आम आदमी को बिचौलियों से मुक्ति दिलाएंगी और पारदर्शिता लाएंगी। लेकिन 2026 में आकर हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। जहां शहरों के युवा और शिक्षित वर्ग को कुछ सुविधाएं अवश्य मिली हैं, वहीं वरिष्ठ नागरिक, ग्रामीण आबादी और तकनीकी रूप से कमजोर तबके के लिए यह अभियान एक नई मुसीबत बन गया है। डिजिटलीकरण ने अनेक समस्याएं पैदा कर दी हैं, जिनका सामना रोजमर्रा की जिंदगी में लाखों लोग कर रहे हैं। भारत में करीब 15 करोड़ वरिष्ठ नागरिक हैं और 2050 तक यह संख्या दोगुनी होने वाली है। हैल्पएज इंडिया जैसे संगठनों के सर्वे के अनुसार, 85.8 प्रतिशत बुजुर्ग डिजिटली निरक्षर हैं। केवल 5 प्रतिशत ही ऑनलाइन बैंकिंग या स्वास्थ्य सेवाओं का उपयोग करते हैं। 66 प्रतिशत इन सेवाओं को भ्रमित करने वाली मानते हैं और 51 प्रतिशत गलती करने के डर से बचते हैं।

आम व वरिष्ठ नागरिकों को लैंड टैक्स के लिए, एल.पी.जी., आधार, लाइसैंस, पासपोर्ट, बैंकिंग और जीवन प्रमाण आदि के लिए विभिन्न वैबसाइटों और बायोमैट्रिक स्कैनर का सामना करना पड़ता है। ऐसे में वरिष्ठ नागरिकों की उंगलियों की रगड़ या आर्थराइटिस के कारण स्कैनर काम नहीं करता। पासवर्ड भूलना, छोटे फॉन्ट पढऩा, ओ.टी.पी. प्राप्त करना, ये सब रोजमर्रा की जद्दोजहद बन गए हैं। दिल्ली में रहने वाली एक वरिष्ठ नागरिक को अपने कुछ शेयर सर्टिफिकेट से संबंधित कार्य के लिए सरकार द्वारा कॉर्र्पोरेट कार्य मंत्रालय के पोर्टल पर आवेदन करना अनिवार्य बताया गया। जब-जब वह अपना आवेदन मंत्रालय की वैबसाइट पर डालतीं तो किसी न किसी कारण वह अस्वीकार हो जाता। हार कर उन्हें कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय जाना पड़ा, जहां पहुंच कर देखा कि वह अकेली ही परेशान नहीं थीं, उनके जैसे वहां कई थे। लगभग एक साल तक चले संघर्ष के दौरान एक समय तो ऐसा आया कि उन्होंने हिम्मत हार दी और अपनी मेहनत की कमाई से लिए शेयरों को छोड़ देने का फैसला तक करलिया। लेकिन निरंतर पीछे पड़े रहने से और बारबार आवेदन करने के पश्चात उनके शेयर सर्टिफिकेट डिजिटल फॉर्म में बदले गए और कंपनी से उन्हें डिविडैंड भी मिला। इससे पता चलता है कि ‘डिजिटल इंडिया’ की वास्तविकता सरकारी दावों से कोसों दूर है।  

उल्लेखनीय है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने भी ‘डिजिटल डिवाइड’ पर टिप्पणी की है और कहा है कि वैल्फेयर स्कीमों के लिए ऑनलाइन मोड गरीबों, वरिष्ठों और दिव्यांगों के लिए बाधा बन रहा है। भाषा की समस्या भी गंभीर है, ज्यादातर पोर्टल अंग्रेजी में हैं, जबकि ग्रामीण या अर्ध-शहरी बुजुर्ग क्षेत्रीय भाषाओं में ही सहज होतेहैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनैट पहुंच मात्र 34-41 प्रतिशत है, जबकि शहरी क्षेत्रों में 70 प्रतिशत से अधिक।ट्राई के आंकड़ों और विभिन्न अध्ययनों से पता चलता है कि कनैक्टिविटी की कमी, बिजली की अनियमितता और डिवाइस की महंगाई बड़ी बाधाएं हैं। ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं, जैसे कि पी.एम. किसान, पैंशन, राशन, लखपति बेटी योजना आदि के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरने पड़ते हैं। नैटवर्क चला जाए तो पूरा फॉर्म दोबारा भरना पड़ता है। दस्तावेज अपलोड में नाम के स्पैलिंग की गड़बड़ी, फाइल साइज की लिमिट, फॉर्मेट समस्या या पोर्टल क्रैश आम हैं। महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और दिव्यांगों में डिजिटल साक्षरता और भी कम है। स्मार्टफोन अक्सर पुरुष सदस्यों के पास ही रहता है। बायोमैट्रिक फेलियर-उंगलियों के घिसने, त्वचा की समस्या या बुढ़ापे के कारण-आधार आधारित प्रमाणीकरण को विफल कर देते हैं। परिणामस्वरूप पैंशन रुक जाती है, राशन नहीं मिलता और लोग सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते रहते हैं।

अधिकांश पोर्टल पर दस्तावेज अपलोडकी फाइल साइज लिमिट होती है। बड़े स्कैन या कईफोटो अपलोड नहीं हो पाते। फॉर्मेट सपोर्ट नहीं करता, पोर्टल धीमे चलता है या शाम को क्रैश हो जाताहै। डिजिटलीकरण ने साइबर अपराध को बढ़ावा दिया है। बुजुर्गों को ‘डिजिटल अरैस्ट’ या फर्जी अधिकारी बनकर ठगी का शिकार बनाया जाता है। ऐसे मामले सामने आने पर भी लोगों का विश्वास डिजिटल प्रणाली से उठने लगता है।  सरकार को इस समस्या के समाधान की दिशा में कदम उठाने चाहिएं। हर ब्लॉक में बुजुर्गों और ग्रामीणों के लिए फ्री हैल्प डैस्क हों। महत्वपूर्ण सेवाओं में हाइब्रिड मोड होने चाहिएं, ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों। यूजर इंटरफेस को सरल,क्षेत्रीय भाषाओं में, बड़े फॉन्ट और वॉयस गाइडैंस के साथ बनाना चाहिए। इसके साथ ही फाइल साइज और टैक्निकल लिमिट्स को बढ़ाना और मोबाइल फ्रैंडली बनाना चाहिए। ‘डिजिटल इंडिया’ को सफल बनाने के लिए इसे समावेशी बनाना जरूरी है। प्रौद्योगिकी सेवा करे, बाधा न बने। अन्यथा, विकास की यह गाड़ी आधी आबादी को पीछे छोड़कर आगे बढ़ेगी, जोन सिर्फ अन्याय है, बल्कि राष्ट्र की प्रगति में बाधकभी।-रजनीश कपूर

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