CJP आंदोलन पॉलिटिकल पार्टियों के लिए कैसे बना इंस्टाग्राम की नई प्लेबुक? पीएम मोदी की एक पोस्ट पर एंगेजमेंट 290 फीसदी तक बढ़ा

कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन ने न सिर्फ देश के शिक्षा मंत्री का इस्तीफा करवाया बल्कि इस देश की राजनीति को एक नई दिशा देने का भी काम किया। दरअसल, CJP के आंदोलन से देश की सभी क्षेत्रीय और राष्ट्रीय पार्टियों को Gen Z की ताकत का पता चला। इस आंदोलन के बाद लगभग सभी राजनीतिक दल Gen Z युवाओं से जुड़ाव के लिए सभी जरूरी कदम उठाने लगे हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो CJP आंदोलन के बाद से इंस्टाग्राम पर लगातार एक्टिव रहने लगे हैं और यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की Instagram पर हर पोस्ट की एवरेज एंगेजमेंट 20 जुलाई के बाद करीब 290 फीसदी बढ़ गई है।
यह बदलाव सिर्फ पीएम मोदी के साथ ही देखने को नहीं मिला है बल्कि विपक्षी पार्टियों ने Gen Z युवाओं से जुड़ाव के लिए मेहनत करनी शुरू की है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी की भी इंस्टाग्राम पर एक्टिविटी बढ़ी है और सेम अवधि में राहुल गांधी की इंस्टाग्राम पर औसत एंगेजमेंट में करीब 181% की बढ़ोतरी हुई है।
CJP आंदोलन के सफल रहने के बाद भारत के राजनीतिक दल अब Instagram पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। वे यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि Gen Z यानी युवा पीढ़ी तक कैसे पहुंचा जाए? नई युवा पीढ़ी से जुड़ाव के लिए प्रधानमंत्री इंस्टाग्राम पर Reels का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि राहुल गांधी ने Instagram के AMA (Ask Me Anything) फॉर्मेट का इस्तेमाल शुरू किया है।
CJP आंदोलन से पहले पीएम मोदी और राहुल गांधी इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट का इंगेजमेंट
| नाम | 20 जुलाई से पहले | 20 जुलाई के बाद | बढ़ोतरी |
| नरेंद्र मोदी | 11,87,052 | 46,28,183 | 289.89% |
| राहुल गांधी | 1,51,741 | 4,26,005 | 180.74% |
CJP आंदोलन की सफलता के बाद सत्ताधारी और विपक्षी पार्टियों ने Gen Z युवाओं से जुड़ाव को जो तरीका अपनाया है वह कहीं न कहीं 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है, लेकिन एक बड़ा सवाल यही है कि यह तरीका कितना काम करेगा? क्या राजनीतिक दलों को इसका फायदा होगा? या CJP प्रोटेस्ट की सफलता युवा वोटरों के पॉलिटिक्स से जुड़ने के तरीके में एक गहरे बदलाव को दिखाती है?
CJP प्रोटेस्ट की सफलता की सबसे बड़ी वजह ही सोशल मीडिया और खासकर इंस्टाग्राम था क्योंकि मेन स्ट्रीम मीडिया से शुरुआत में इस प्रोटेस्ट को कवरेज नहीं मिली थी, लेकिन सोशल मीडिया के जरिए ही इस आंदोलन ने अपनी सफलता को लिखा था, इसलिए भी राजनीतिक दल इस आंदोलन की सफलता के बाद सोशल मीडिया की ओर झुके हैं।
सोशल मीडिया के जरिए इस कैंपेन ने आखिरकार हजारों युवाओं को दिल्ली के जंतर-मंतर पर इकट्ठा किया और बाद में देश के कई दूसरे हिस्सों में प्रोटेस्ट शुरू कर दिए। इसलिए CJP प्रोटेस्ट की अहमियत सिर्फ यह नहीं थी कि इसने इंस्टाग्राम पर अधिक इंगेजमेंट पैदा किया बल्कि यह दिखाया कि इस नई पीढ़ी से ऑनलाइन बातचीत फिजिकली बातचीत से अधिक प्रभावी मानी जाएगी और फिर यह पॉलिटिकल प्रेशर में बदल सकती है।
CJP को सोशल मीडिया पर सफलता कैसे मिली?
सिर्फ सोशल मीडिया के जरिए CJP को मिली सफलता से हर कोई हैरान भी है। लोगों के मन में सवाल तो हैं कि CJP को किस चीज ने अलग बनाया? क्या यह सिर्फ अधिक वायरल होने की वजह से हुआ? या सोशल मीडिया पर कुछ बिल्कुल अलग हुआ? इन सवालों का जवाब खोजने के लिए Databeings कंपनी ने CJP प्रोटेस्ट के आस-पास इंस्टाग्राम पर हुई बातचीत का एनालिसिस किया और जो चीजें सामने आईं वह एक पैटर्न पर आधारित थी जिसने इस कैंपेन को एक आम पॉलिटिकल सोशल मीडिया कैंपेन से अलग बनाया।
छोटे यंग क्रिएटर्स पार्टिसिपेंट्स बने
डेटाबीइंग्स के आंकड़ों से पता चलता है कि CJP आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत बड़े नेता या बड़े मीडिया हाउस नहीं थे, बल्कि छोटे कंटेंट क्रिएटर्स थे। इन कंटेंट क्रिएटर्स प्रोटेस्ट के आस-पास कंटेंट बनाया और फिर उनका कंटेंट सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ।
आंकड़ों के अनुसार, 36% क्रिएटर्स ऐसे थे जिनके 1,000 से कम फॉलोअर्स थे। 84% से अधिक क्रिएटर्स की उम्र 18 से 24 वर्ष के बीच थी। लगभग 28% महिला क्रिएटर्स ने इसमें सक्रिय रूप से भाग लिया। इसका सीधा मतलब यह है कि यह किसी राजनीतिक दल की एकतरफा मुहिम नहीं थी, बल्कि आम युवाओं ने खुद अपनी आवाज में कंटेंट तैयार किया गया।

इस डेटा का महत्व सिर्फ यह नहीं है कि छोटे क्रिएटर्स ने एंगेजमेंट पैदा किया। बल्कि यह है कि उन्होंने खुद पॉलिटिकल बातचीत में हिस्सा लेने का फैसला किया। इस मुद्दे पर अब सिर्फ वे लोग ही चर्चा नहीं कर रहे थे जिनकी मुख्य पहचान पॉलिटिकल थी।
दिल्ली से बाहर पूरे देश में फैला इसका दायरा
CJP आंदोलन केवल दिल्ली या किसी एक विशेष क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। देश के कोने-कोने से युवाओं ने इसमें हिस्सा लिया था। इस आंदोलन में देशभर के कंटेंट क्रिएटर्स ने भी हिस्सा लिया था।
किस राज्य से कितने प्रतिशत कंटेंट क्रिएटर्स आए?
| राज्य | प्रतिशत हिस्सेदारी |
| महाराष्ट्र | 15.34% |
| उत्तर प्रदेश | 10.05% |
| तमिलनाडु | 8.47% |
| राजस्थान | 7.41% |
| दिल्ली | 6.61% |
| तेलंगाना | 6.35% |
| कर्नाटक | 5.29% |
| केरल | 5.29% |
| झारखंड | 4.76% |
| आंध्र प्रदेश | 4.50% |
| गुजरात | 4.50% |
| बिहार | 3.97% |
| मध्य प्रदेश | 3.97% |
| ओडिशा | 3.44% |
| पश्चिम बंगाल | 3.44% |
| पंजाब | 2.12% |
| हरियाणा | 1.59% |
| उत्तराखंड | 1.06% |
| असम | 0.79% |
| जम्मू और कश्मीर | 0.53% |
| हिमाचल प्रदेश | 0.26% |
राजनीतिक दलों के लिए नया प्लेबुक: ‘केंद्रीकृत विचार, विकेंद्रीकृत अभिव्यक्ति’
राजनीतिक पार्टियों को यह समझना होगा कि टीवी विज्ञापन या लंबे भाषणों को काटकर 30 सेकेंड की रील बना देना इंस्टाग्राम-नेविट (Native) रणनीति नहीं है। इंस्टाग्राम एक कल्चरल नेटवर्क है। पार्टियों को अपनी रणनीति बदलनी होगी। पार्टियों को अब केंद्रीकृत विचार (Centralised Narrative) जैसे पार्टी मुख्य मुद्दे, तथ्य और नीतियां तय करने पर काम करें तो बेहतर नतीजे मिलेंगे। वहीं विकेंद्रीकृत अभिव्यक्ति (Decentralised Expression) जैसे आम क्रिएटर्स और युवा उन मुद्दों को अपनी शैली, स्थानीय भाषा, मीम्स या व्यंग्य के जरिए जनता तक पहुंचाएं।-सुमित गुप्ता




