यूपी में अकेले रहने वाले बुजुर्गों को मिलेंगे किराए के सस्ते घर, आवास विभाग के सचिव की अध्यक्षता में बनी कमिटी

लखनऊ: यूपी में अकेले रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों के लिए सरकार रियायती और सुरक्षित किराए के घरों की पॉलिसी लाने जा रही है। इसके लिए आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के सचिव की अध्यक्षता में नौ सदस्यीय कमिटी बना दी गई है। कमिटी शासन को अपनी सिफारिश सौंपेगी। विशेष सचिव राजेश कुमार राय की तरफ से इसका पत्र जारी किया गया है।
आवास विभाग के सूत्रों की मानें तो विकास प्राधिकरण की योजनाओं में बुजुर्गों के लिए किराए के आवास बनाने वाले डिवेलपरों को लैंड यूज और डिवेलपमेंट फीस में छूट के साथ ही ज्यादा ऊंचाई तक निर्माण (एक्स्ट्रा एफएआर) की मंजूरी दी जा सकती है। इन रियायतों से निर्माण सस्ता होगा, जिसका फायदा अकेले रहने वाले बुजुर्गों को सस्ते किराए के मकान मिल सकेंगे।
वरिष्ठ नागरिकों के पास कम विकल्प
प्रदेश में वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुरक्षित, सुविधाजनक और पेशेवर ढंग से चलने वाले किराए के आवासों की जरूरत बढ़ी है। विकास प्राधिकरण की योजनाओं में इस समय सीनियर सिटीजन के लिए विकसित होने वाले ज्यादातर प्रॉजेक्ट में घर खरीदने के लिए बड़ी रकम निवेश करनी पड़ती है। ऐसे में रिटायर सरकारी कर्मचारी, पेशेवर, एनआरआई परिवारों के बुजुर्ग माता-पिता और मध्यम आय वर्ग के वरिष्ठ नागरिकों के लिए विकल्प काफी कम होते हैं।
मासिक किराये पर रह सकेंगे बुजुर्ग नागरिक
माना जा रहा है कि इस तबके के लिए किराए पर आधारित सीनियर लिविंग मॉडल वरिष्ठ नागरिकों की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा कर सकता है। इस मॉडल के तहत बनने वाली इमारतों में वरिष्ठ नागरिक मासिक किराये के आधार पर रह सकेंगे। इसमें सुरक्षा, स्वास्थ्य सहायता, हाउसकीपिंग, भोजन व्यवस्था, आपातकालीन सहायता और सामजिक गतिविधियों जैसी सुविधाएं मिलेंगी।
समिति में वीसी समेत कई अफसर
समिति में आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के सचिव को अध्यक्ष बनाया गया है। इस समिति में लखनऊ, कानपुर, गाजियाबाद, वाराणसी और मेरठ विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के अपर आवास आयुक्त, मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक और आवास बंधु के निदेशक को शामिल किया गया है।



