उत्तरप्रदेश

‘देश को कमजोर करने की कोशिश करने वालों के अंदर रावण’, दशहरा कार्यक्रम में बोले CM योगी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विजयादशमी के अवसर पर गोरखपुर में आयोजित दशहरा कार्यक्रम में हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने रामलीला समिति आर्य नगर के कार्यक्रम को संबोधित किया. योगी आदित्यनाथ ने भगवान श्रीराम के आदर्शों, सनातन धर्म की परंपरा और सामाजिक एकता पर बात की. उन्होंने भारत की एकता को कमजोर करने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि भाषा और जाति के नाम पर देश को कमजोर करने की कोशिश करने वालों के अंदर रावण की आत्मा आ गई है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि विजयादशमी सनातन धर्म का महापर्व है. यह पर्व पूरे देश को भगवान श्रीराम की मर्यादा, उनके वचन और कर्म से जोड़ता है. उन्होंने प्रदेशवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह त्योहार हर व्यक्ति के मन में नया उत्साह और उमंग पैदा करता है.

भगवान श्रीराम के आदर्शों का किया जिक्र

सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में भगवान श्रीराम के जीवन और उनके संघर्षों का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि हजारों वर्षों से भगवान श्रीराम की मर्यादा, उनके वचन और कर्म भारतीय समाज को प्रेरणा देते रहे हैं. उन्होंने अधर्म, अन्याय और अत्याचार के खिलाफ भगवान श्रीराम के संघर्ष को याद किया.

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऋषि-मुनियों पर अत्याचार और समाज में हो रहे अन्याय के खिलाफ भगवान श्रीराम ने जो संकल्प लिया था, उसे पूरा किया. उन्होंने कहा कि जब किसी नारी की गरिमा पर हमला करने का प्रयास हुआ, तब भगवान श्रीराम ने अत्याचारी का अंत किया.

योगी आदित्यनाथ ने कहा, “दुराचारी कितना भी बड़ा और ताकतवर क्यों ना हो त्रिलोक विजय की क्षमता भी क्यों ना रखता हो उसको नष्ट होना ही होना है.” उन्होंने समुद्र पर सेतु निर्माण का उदाहरण देते हुए दृढ़ निश्चय और संकल्प की महत्ता पर जोर दिया. मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या से निकले दो राजकुमारों ने रावण जैसे अत्याचारी पर विजय प्राप्त की थी.

भाषा और जाति के नाम पर देश को बांटने वालों पर निशाना

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “जब भारत कमजोर होता है तब राम मंदिर और राम जन्म भूमि अपमानित होती है. भारत जब कमजोर होता है तब कृष्ण जन्मभूमि अपमानित होती है. भारत जब कमजोर होता है तो काशी विश्वनाथ का मंदिर अपमानित होता है.”

योगी ने कहा कि भारत मजबूत होता है तो नरेंद्र मोदी जैसा नेतृत्व मिलता है और देश 500 वर्ष पहले तोड़ी गई गरिमा को वापस पाने में समर्थ होता है. उन्होंने अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण का जिक्र करते हुए कहा कि देश की मजबूती से ही ऐसे कार्य संभव हो पाते हैं.

योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या और राम मंदिर को लेकर कथित दुष्प्रचार का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग अयोध्या को अपमानित करने और लोगों के बीच भ्रम पैदा करने का काम कर रहे हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों ने रामलला के दर्शन तक नहीं किए, वे भी राम मंदिर के खिलाफ दुष्प्रचार करते हैं. उन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरान राम भक्तों पर गोलियां चलाई गई थीं और अत्याचार किए गए थे.

उन्होंने कहा कि आज भी कुछ लोग राम-राम का नाम लेते हैं, लेकिन केवल नाम लेने से किसी की पहचान नहीं हो जाती. मुख्यमंत्री योगी ने हनुमान जी और कालनेमि का उदाहरण देते हुए कहा कि लोगों को पहचानना होगा कि कौन कालनेमि की तरह बाधा पैदा कर रहा है और धोखा देने की कोशिश कर रहा है.

रामलीला को बताया सामाजिक समरसता का उदाहरण

मुख्यमंत्री ने गांवों में होने वाली रामलीलाओं को सामाजिक एकता और समरसता का उदाहरण बताया. उन्होंने कहा कि रामलीला में अलग-अलग पात्रों की भूमिका निभाने वाले लोग एक साथ आते हैं. कोई राम बनता है, कोई लक्ष्मण, कोई भरत, कोई दशरथ, तो कोई रावण, कुंभकरण या मेघनाद की भूमिका निभाता है.

उन्होंने कहा कि रामलीला में समाज के अलग-अलग लोग मिलकर भगवान श्रीराम की कथा का मंचन करते हैं. इससे सामाजिक समरसता और सामूहिक भागीदारी का संदेश मिलता है.

सीएम योगी आदित्यनाथ ने बताया कि उत्तर प्रदेश में करीब 45 हजार स्थानों पर दुर्गा पूजा के आयोजन हो रहे हैं. इसी तरह बड़ी संख्या में रामलीलाओं का आयोजन भी किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार के सहयोग के बिना भी लोग परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं और विजयादशमी के अवसर पर रावण के पुतले का दहन कर रहे हैं.

रावण के दस सिरों का बताया अर्थ

योगी आदित्यनाथ ने रावण के दस सिरों के प्रतीकात्मक अर्थ पर भी बात की. उन्होंने कहा कि रावण के दस सिर केवल एक पौराणिक प्रसंग नहीं हैं, बल्कि समाज में मौजूद बुराइयों को भी दर्शाते हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा कि अधर्म, अन्याय, अत्याचार, भ्रष्टाचार, दुराचार, दुष्प्रचार और नशे जैसी बुराइयों के खिलाफ समाज को एकजुट होना होगा. उन्होंने कहा कि ऐसी प्रवृत्तियां समाज और राष्ट्र की एकता में बाधा बनती हैं.

उन्होंने कहा कि अगर रामराज्य का मार्ग प्रशस्त करना है, तो समाज और राष्ट्र की एकता में बाधक बनने वाली प्रवृत्तियों का मजबूती से विरोध करना होगा. मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में देश की सुरक्षा और सनातन धर्म के संरक्षण को एक-दूसरे से जुड़ा बताया.

उन्होंने कहा, “देश है तो धर्म भी है, धर्म है तो हम सब भी हैं. कोई व्यक्ति कोई समाज कोई जाति तब तक सुरक्षित नहीं है जब तक भारत सुरक्षित नहीं है.”

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की परंपरा सभी जातियों, संप्रदायों और मतों को साथ लेकर चलने की रही है. उन्होंने ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः’ की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की ऋषि परंपरा सभी के कल्याण की बात करती है.

उन्होंने लोगों से अपील की कि वे भारत की एकता और अखंडता की रक्षा के लिए एकजुट रहें. साथ ही युवाओं, महिलाओं और पूरे समाज से दुष्प्रचार तथा नशे जैसी बुराइयों के खिलाफ खड़े होने का आह्वान किया.

योगी आदित्यनाथ ने भगवान हनुमान के प्रसंग का जिक्र करते हुए लोगों को अपने कर्तव्य के प्रति समर्पित रहने का संदेश दिया. उन्होंने बताया कि जब हनुमान जी लंका की ओर जा रहे थे, तब मैनाक पर्वत ने उन्हें विश्राम करने के लिए कहा था. लेकिन हनुमान जी ने भगवान श्रीराम का कार्य पूरा करने को प्राथमिकता दी.

मुख्यमंत्री ने कहा, “रामकाज किनो तब कहां विश्राम.” उन्होंने इस प्रसंग के माध्यम से कहा कि समाज और देश के हित में काम करने वाले लोगों को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहना चाहिए.

राम मंदिर आंदोलन और पुराने संकल्प को किया याद

मुख्यमंत्री ने राम मंदिर आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि एक समय लोग मानते थे कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण नहीं हो पाएगा. उस दौर में राम भक्तों का संकल्प था, “राम लला हम आएंगे मंदिर वहीं बनाएंगे.”

उन्होंने कहा कि राम भक्तों ने संघर्ष के दौरान यह भी कहा था, “लाठी गोली खाएंगे लेकिन मंदिर वहीं बनाएंगे.” सीएम योगी ने कहा कि उस समय भाजपा की सत्ता नहीं थी, लेकिन सनातन की एकता और मंदिर निर्माण का संकल्प मौजूद था.

मुख्यमंत्री ने आर्य नगर रामलीला समिति को धन्यवाद दिया. उन्होंने बताया कि उन्हें भगवान श्रीराम, माता जानकी, लक्ष्मण और पवनपुत्र हनुमान का तिलक करने का सौभाग्य मिला. उन्होंने रामलीला की पुरानी परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज में व्यक्ति के कार्य और उसके कल्याणकारी वचनों का सम्मान करना ही भारतीय परंपरा की विशेषता है.

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