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कितना खून बहने पर हो जाती है मौत? फिल्म डायरेक्टर संजय गुप्ता के केस से समझें

मुंबई फिल्म इंडस्ट्री से 30 अक्टूबर 2026 को एक ऐसी खबर सामने आई, जिसे सुन हर कोई हैरान हो रहा है. कांटे, शूटआउट एट लोखंडवाला और काबिल जैसी फिल्मों के डायरेक्टर और फिल्ममेकर संजय गुप्ता का 57 साल की उम्र में निधन हो गया. पुलिस जानकारी के मुताबिक वह मुंबई के वर्सोवा स्थित अपने घर में किचन में फिसलकर गिर गए थे. जिससे उनके सिर पर गंभीर चोट लगी और अधिक खून बहने से उनकी मौत हो गई. उस समय उनकी पत्नी, दो बेटे और घर में काम करने वाले लोग भी मौजूद थे, लेकिन सभी को तुरंत हादसे का पता नहीं चला. परिवार को घटना की जानकारी बाद में हुई और उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके.

संजय गुप्ता की मौत की इस घटना ने सिर में चोट लगने और शरीर में होने वाले रक्तस्राव के खतरों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए है. आखिर शरीर से कितना खून निकलने पर इंसान की जान जा सकती है? क्या सिर में चोट लगने पर बिना ज्यादा बाहरी खून बहे भी मौत हो सकती है?  दरअसल हमारा शरीर खून पर काफी हद तक निर्भर करता है. खून सिर्फ शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम नहीं करता, बल्कि यह पोषक तत्वों को पहुंचाने और शरीर का तापमान नियंत्रित रखने में भी मदद करता है. जब किसी चोट, दुर्घटना या अंदरूनी ब्लीडिंग के कारण शरीर से अधिक मात्रा में खून निकल जाता है, तो महत्वपूर्ण अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचने में परेशानी होने लगती है. इस स्थिति को Hemorrhagic Shock कहा जाता है.

शरीर में कितना खून होता है?

एक सामान्य सवस्थ व्यक्ति के शरीर में उसके वजन के हिसाब से खून की मात्रा होती है. सामान्य 70 किलो वजन वाले व्यक्ति के शरीर में लगभग 5 लीटर खून मौजूद होता है. महिलाओं में यह मात्रा शरीर के वजन और बनावट के अनुसार अलग हो सकती है. जब शरीर से खून निकलना शुरू होता है, तो शरीर इसकी भरपाई करने की कोशिश करता है. दिल की धड़कन तेज हो जाती है, ताकि कम खून के बावजूद जरूरी अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचती रहे. लेकिन एक सीमा के बाद शरीर का यह प्राकृतिक बचाव भी काम करना बंद करने लगता है.

कितना खून निकलना हो सकता है जानलेवा?

खून की कमी को मुख्य रूप से चार चरणों में बांटा गया है. इससे समझा जा सकता है कि रक्तस्राव बढ़ने पर शरीर पर किस तरह का असर पड़ता है. अगर किसी व्यक्ति के शरीर से लगभग 750 मिलीलीटर तक खून निकलता है, तो इसे शुरुआती चरण माना जाता है. इस स्थिति में आमतौर पर शरीर खुद को संभालने की कोशिश करता है. जब शरीर से लगभग 750 मिलीलीटर से 1.5 लीटर तक खून निकल जाता है, तो स्थिति गंभीर होने लगती है. व्यक्ति की धड़कन तेज हो सकती है, सांस लेने की गति बढ़ सकती है और बेचैनी महसूस हो सकती है.

2 लीटर से अधिक खून निकलना है खतरनाक

तीसरे चरण में करीब 1.5 से 2 लीटर खून निकल सकता है. इसमें शरीर का ब्लड प्रेशर गिरने लगता है. व्यक्ति को चक्कर आने, भ्रम होने और कमजोरी महसूस होने जैसी समस्याएं होने लगती हैं. यह मेडिकल इमरजेंसी होती है. अगर शरीर से 2 लीटर से अधिक खून निकल जाता है, तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है. दिल, दिमाग और किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती. जिससे समय पर इलाज नहीं मिलने पर व्यक्ति की मौत भी हो सकती है.

सिर में चोट लगने पर बढ़ जाता है खतरा

सिर में चोट लगना हमेशा बाहरी रक्तस्राव से जुड़ा नहीं होता. कई बार सिर के अंदर मौजूद रक्त वाहिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और खून दिमाग के आसपास जमा होने लगता है. इसे इंटरनल ब्लीडिंग या इंट्राक्रेनियल हेमरेज कहा जाता है. ऐसी स्थिति में बाहर से खून निकलता हुआ दिखाई नहीं देता, लेकिन दिमाग के अंदर दबाव बढ़ सकता है. इससे व्यक्ति बेहोश हो सकता है और समय पर इलाज नहीं मिलने पर उसकी जान भी जा सकती है. संजय गुप्ता के मामले में सामने आई पुलिस जानकारी के मुताबिक, उनकी मौत सिर में लगी गंभीर चोट के कारण हुई.

इन बातों का रखें ध्यान

अगर किसी व्यक्ति को चोट लगने के बाद लगातार खून बह रहा है, तो उसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. ऐसी स्थीति में सबसे पहले एंबुलेंस बुलाना चाहिए या व्यक्ति को तुरंत अस्पताल पहुंचाना चाहिए. बाहरी घाव से खून निकलने पर साफ कपड़े या गॉज से लगातार दबाव बनाए रखना चाहिए. सिर में चोट लगने, बेहोशी या उल्टी होने पर तुरंत मेडिकल सहायता लें. वहीं व्यक्ति को अनावश्यक रूप से हिलाने-डुलाने से बचें.

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