Yes Bank के 8415 करोड़ रुपये के AT1 बॉन्ड पर नया विवाद, ट्रस्टी ने दी सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी

नई दिल्ली। शेयर बाजार में हमेशा चर्चा में रहने वाले बैंक यस बैंक को लेकर फिर से एक बड़ी खबर है। इस बार खबर उसके ₹8415 करोड़ के AT1 बॉन्ड को लेकर है। दरअसल, बैंक ने शेयर बाजार को जानकारी दी है कि एक्सिस ट्रस्टी सर्विसेज लिमिटेड (Axis Trustee Services Limited) ने बैंक से बॉन्ड को दोबारा बहाल करने और इससे जुड़ी सभी जरूरी प्रक्रियाएं तीन दिनों के भीतर पूरी करने को कहा है। इस खबर का असर सोमवार को बैंक के शेयरों पर देखने को मिल सकता है। शुक्रवार को यस बैंक के शेयर -1.81% गिरकर 15.2 रुपये के स्तर पर बंद हुए थे।
बैंक ने अपनी फाइलिंग में आगे कहा कि कि एक्सिस ट्रस्टी सर्विसेज लिमिटेड ने कहा कि अगर यस बैंक ऐसा नहीं करते तो वह बैंक निदेशकों और अधिकारियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की चेतावनी दी है।
इसके जवाब में Yes Bank ने 30 अक्टूबर को कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले और लागू कानूनों का पूरी तरह पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, बैंक ने जानबूझकर अदालत के आदेश की अवहेलना करने के आरोपों को खारिज कर दिया। बैंक के मुताबिक, ट्रस्टी के पत्र में लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। फिलहाल बैंक सुप्रीम कोर्ट के फैसले और उसके कानूनी प्रभावों की विस्तार से जांच कर रहा है।
क्या है Yes Bank का AT1 बॉन्ड मामला?
यस बैंक का एटी1 बॉन्ड मामला 2020 का है। जब बैंक की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए पुनर्गठन योजना लागू की गई थी। इसी प्रक्रिया के तहत बैंक ने ₹8,415 करोड़ के AT1 बॉन्ड को राइट ऑफ यानी पूरी तरह खत्म कर दिया था। यानी इस बॉन्ड में जिन निवेशकों को पैसे लागए थे उसकी वैल्यू शून्य कर दी गई थी।
यस बैंक के बॉन्ड में निवेश करने वाले निवेशकों को बड़ा नुकसान हुआ था। हालांकि, इस फैसले को चुनौती दी गई थी और बॉम्बे हाई कोर्ट ने बॉन्ड को राइट ऑफ करने के फैसले को रद कर दिया था। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्टने भी बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। इससे बॉन्डधारकों के लिए अपने निवेश को दोबारा बहाल कराने का रास्ता खुल गया।
Axis Trustee Services ने क्या मांग की थी?
एक्सिस ट्रस्टी सर्विसेज ने यस बैंक से मांग की वह जल्द से जल्द बॉन्ड को बहार करे और जरूरी कमद उठाए। इसमें नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) और सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (CDSL) के रिकॉर्ड से बॉन्ड को खत्म करने से जुड़ी एंट्री हटाना शामिल है।
अब देखना होगा कि Yes Bank सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुपालन में आगे क्या कदम उठाता है और ₹8,415 करोड़ के इन बॉन्ड की बहाली की प्रक्रिया कब तक पूरी होती है।




