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पीएम मोदी ने बढ़ाया बड़ा कदम, वांगचुक ने तोड़ा अनशन; प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी सीजेपी

नई दिल्ली। संसद में चर्चा की तैयारी और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं के साथ बातचीत का रास्ता खोलने के बीच सरकार ने पेपर लीक की गंभीर समस्या से निपटने की ओर भी कदम बढ़ा दिए हैं।

प्रधानमंत्री ने इसी कड़ी में पहले गुरुवार को दिन में पेपर लीक से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे और कड़ी सजा के लिए देशभर में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का एलान किया है।

फिर देर रात एक वीडियो संदेश जारी कर पेपर लीक के विरुद्ध कठोर कानून लाने का एलान कर दिया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक में लाया जाएगा और मानसून सत्र में ही पारित करने का प्रयास किया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रियों की सीजेपी प्रतिनिधिमंडल से दोपहर 12.30 बजे होगी, यह बैठक कहां होगी, इसका स्थान उजागर नहीं किया गया है। प्रधानमंत्री के वीडियो संदेश के कुछ देर बाद ही सोनम वांगचुक ने अपना अनशन तोड़ दिया।

गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती वांगचुक को अनशन के 27वें दिन स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया। प्रधानमंत्री ने वीडियो संदेश में कहा कि पेपर लीक कोई मामूली विषय नहीं है। लाखों विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के लिए यह बहुत ही पीड़ादायक है।

नीट पेपर लीक की घटना के बाद पिछले ढाई महीनों में अनेक कदम उठाए गए हैं, गुनहगारों को पकड़ा गया है और वे जेल में हैं।

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों का एक वर्ष बर्बाद न हो, इसलिए तत्काल परीक्षाएं कराना जरूरी था। सरकार ने कम से कम समय में 22 लाख छात्रों के लिए परीक्षा का प्रबंध किया। पांच-छह दिन पहले 19 जुलाई को रिजल्ट भी आ गया। लेकिन सरकार इतने से संतुष्ट होने वाली नहीं है, इसलिए मैंने आज फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के विभागों को निर्देश दिए थे।

पीएम मोदी ने आगे कहा कि विभागों ने लगातार मेहनत कर देर रात मुझे मसौदा सौंप दिया। फास्ट ट्रैक कोर्ट और कठोर सजा के प्रविधान के इस मसौदे पर शुक्रवार को कैबिनेट में चर्चा होगी। कैबिनेट सहयोगियों के सुझावों के बाद उसे अंतिम रूप दिया जाएगा और सोमवार से शुरू होने रहे मानसून सत्र के दूसरे सप्ताह में इस बिल को जल्द से जल्द पारित कराने का प्रयास किया जाएगा।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘एक्स’ के जरिये पेपर लीक से निपटने के लिए कई ठोस कदम उठाने का भरोसा दिया। उन्होंने साफ किया कि युवाओं के कल्याण और उनके भविष्य से अधिक जरूरी कुछ भी नहीं है। युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

दरअसल, पेपर लीक मामले में दोषियों को सजा मिलना बड़ी समस्या बनी हुई है। एक तो सजा मिलने में काफी देर लगती है, दूसरे उसमें भी कई छूट जाते हैं। इसी कारण ऐसे लोगों को बल मिलता है। फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने से इस समस्या का काफी हद तक हल निकल सकता है।

फास्ट ट्रैक कोर्ट में दिन-प्रतिदिन की सुनवाई से फैसला जल्दी आ सकता है और दोषियों को सजा मिल सकती है। वैसे ऐसे मामलों में जांच की गति भी तेज करने की जरूरत है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री ने फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की बात कही है।

सूत्रों के अनुसार कलकत्ता, दिल्ली, बांबे एवं मध्य प्रदेश हाई कोर्टों के अधिकार क्षेत्र में प्राथमिकता के आधार पर फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।

ध्यान रहे कि इस वर्ष नीट पेपर लीक मामले में शामिल पाए गए 13 लोग हिरासत में हैं और सीबीआइ जांच चल रही है। जबकि 2024 के नीट पेपर लीक मामले में मुख्य आरोपित संजीव मुखिया को सीबीआइ ने क्लीन चिट दे दी है। जाहिर है कि जांच में तेजी भी सुनिश्चित करनी होगी।

प्रधानमंत्री की नई घोषणा इसलिए भी अहम है क्योंकि सीजेपी और संसद में विपक्ष चर्चा से पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा है। ऐसे में सरकार ने परीक्षा को फूलप्रूफ बनाने की दिशा में एक और कदम बढ़ाया है।

इसके पहले मंगलवार को भी प्रधानमंत्री मोदी ने राजग सांसदों के साथ “मंगल मिलन” बैठक में पेपर लीक को महापाप बताते हुए इसके दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा सुनिश्चित करने की जरूरत पर बल लिया था। उन्होंने ऐसे मामलों में अदालतों में वरिष्ठ वकीलों को लगाने पर भी जोर दिया था।

विवादों में घिरे विनीत जोशी उच्च शिक्षा सचिव पद से हटाए गए

नीट पेपर लीक को लेकर विवादों में घिरे शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी को केंद्र सरकार ने गुरुवार देर रात हटा दिया। उन्हें पंचायती राज मंत्रालय के सचिव की नई जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए लाए गए समता कानून के लिए भी जिम्मेदार माना जा रहा था, जिसे लेकर भी सरकार की काफी किरकिरी हुई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे लेकर सवाल खड़े किए थे। मौजूदा समय में विनीत जोशी के पास शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा के साथ-साथ स्कूली शिक्षा सचिव की भी जिम्मेदारी थी। वह यूजीसी के चेयरमैन का भी अतिरिक्त प्रभार देख रहे थे।

विनीत जोशी के तबादले को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि नीट-यूजी का आयोजन कराने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत ही आती है। ऐसे में परोक्ष रूप से नीट पेपर लीक के पीछे उन्हें भी जवाबदेह माना जा रहा था।

इसके साथ ही केंद्र सरकार ने सचिव स्तर के कई और शीर्ष अधिकारियों के तबादले किए हैं और नई तैनाती दी है। इनमें पशुपालन मंत्रालय के सचिव नरेश पाल गंगवार को नया उच्च शिक्षा सचिव बनाया गया है, वहीं ग्रामीण विकास मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव टीके अनिल कुमार को स्कूली शिक्षा विभाग के सचिव की जिम्मेदारी दी गई है।

वर्तमान पंचायती राज सचिव विवेक भारद्वाज की 31 जुलाई को सेवानिवृत्ति के बाद विनीत जोशी अपना नया पदभार ग्रहण करेंगे। जोशी के नया पदभार ग्रहण करने के बाद ही गंगवार भी उच्च शिक्षा सचिव के तौर पर कार्यभार संभालेंगे।

गौरतलब है कि जोशी पूर्व में एनटीए के महानिदेशक व सीबीएसई के चेयरमैन रह चुके हैं। 2023 में जातीय संघर्ष के कारण हालात बिगड़ने के बाद उन्हें मणिपुर का मुख्य सचिव नियुक्त किया गया था।

वर्तमान फेरबदल में सबसे अहम तैनाती शहरी विकास मंत्रालय में हुई है, जहां सरकार की ओर से सृजित हुए नए राजधानी विकास विभाग के सचिव पद पर डी. तारा को तैनाती दी गई है। फिलहाल वह अभी शहरी विकास मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के रूप में काम कर रही थी।

सीजेपी बोली- प्रधान के इस्तीफे से कम कुछ भी मंजूर नहीं, आज देशभर में प्रदर्शन

सीजेपी ने प्रधानमंत्री के बयान को नाकाफी बताते हुए स्पष्ट किया है कि वह धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से नीचे नहीं मानेगी। साथ ही केंद्र को बातचीत के लिए जंतर-मंतर या किसी तटस्थ स्थल पर आना होगा और उसके लिए उसे सीधे संपर्क करना होगा।

सीजेपी ने शुक्रवार को पूरे देश में जिला स्तर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। ‘एक्स’ पर जारी पोस्टर में सीजेपी ने सभी छात्र संगठनों को एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन करने को कहा है।

प्रधानमंत्री की पोस्ट पर सीजेपी अध्यक्ष अभिजीत दीपके ने धर्मेंद्र प्रधान को लेकर व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया दी। जबकि सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया का स्वागत करते हुए कहा कि यह लगभग डेढ़ महीने के विरोध-प्रदर्शन के बाद आई है, फिर भी इसमें बार-बार हो रहे पेपर लीक के पीछे के मुख्य सवाल का जवाब नहीं है।

पेपर लीक के बाद आप क्या सजा दे रहे हैं? इससे पेपर लीक की समस्या हल होने वाली नहीं है। पेपर लीक ही क्यों हो रहे हैं, इस सवाल का जवाब दिया जाना चाहिए। असली लड़ाई चोट लगने से रोकने की है। यह इसलिए लगती रहती है क्योंकि सिस्टम चलाने वाले लोग न तो जवाबदेह हैं और न ही काबिल। इसलिए यह उपाय किसी भी तरह से काफी नहीं है।

सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कही ये बात

रांका ने कहा कि यहां बड़ी संख्या में लोग जोश और संकल्प के साथ आए हैं और हर कोई धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है। जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, यह मुद्दा सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान तक सीमित नहीं रहा है, अब केंद्र के नेतृत्व को भी निशाने पर लिया जा रहा है। लोग कह रहे हैं कि प्रधान नहीं, अब प्रधानमंत्री का इस्तीफा चाहिए।

मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास ने स्पष्ट कहा कि सरकार को बातचीत के लिए सीधे पार्टी से संपर्क करना चाहिए। उन्हें सरकार की ओर से बातचीत का कोई सीधा संदेश नहीं मिला है।

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह का कहना है कि सरकार कहीं भी बात कर सकती हैं, तो हमने अपना सुझाव दे दिया है। जंतर-मंतर आएं या कांस्टीट्यूशन क्लब जैसे किसी तटस्थ स्थान पर आएं। हम वहीं मिलेंगे। उनकी तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक संदेश नहीं मिला है।

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