संपादकीय

ईरानी परमाणु बम के ऊहापोह

जब नई दिल्ली ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में एकतरफा युद्ध और आर्थिक प्रतिबंधों के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया जा रहा था, तब अमरीकी कांग्रेस (संसद) में प्रतिबंध संबंधी बिल पर चर्चा की जा रही थी। तभी राष्ट्रपति टं्रप ने संभावना जताई कि ईरान युद्ध अमरीकी मध्यावधि चुनाव (मिड टर्म पोल) के बाद तक खिंच सकता है! वैसे टं्रप इसे ‘युद्ध’ नहीं मानते। यह भी अजीब मान्यता है। बहरहाल उनका मानना है कि चुनावों के बाद ही जंग समाप्त हो सकती है! उसी दौरान अमरीकी सेना ने होर्मुज के पास और तेहरान में आईआरजीसी के मुख्यालय पर हवाई हमले किए। उनमें कुछ सैनिकों के हताहत होने की भी खबर सामने आई है। हमलों की इंतहा के मद्देनजर कुछ ईरानी सांसदों ने कहा कि अब परमाणु बम बनाने का वक्त आ गया है। संसद में प्रस्ताव पेश कर परमाणु नीति में संशोधन पर चर्चा कराई जाए। हालांकि दिल्ली ब्रिक्स सम्मेलन के इतर एक टीवी चैनल के साथ साक्षात्कार के दौरान ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने सवाल की प्रतिक्रिया में सवाल किया कि ईरान में परमाणु बम बनाने के कोई सबूत अमरीका या इजरायल दे सकता है क्या? ईरान की नीति और सोच परमाणु बम बनाने की नहीं रही है। यह फिजूल का आरोप ईरान पर चस्पां किया जाता रहा है, ताकि हम पर हमला किया जा सके। राष्ट्रपति टं्रप और इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू भी बार-बार बयान देते रहे हैं कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे। इसी मकसद से 28 फरवरी को दोनों देशों ने ईरान पर साझा हमला किया था, लेकिन वे अभी तक परमाणु कार्यक्रम की थाह भी नहीं ले सके हैं। यदि ईरान परमाणु शक्ति वाला देश होता, तो वह खामेनेई से फोन पर बात करते, हमले नहीं करते।

यह राष्ट्रपति टं्रप का ताजातरीन बयान है। रक्षा विशेषज्ञ भी ऊहापोह में हैं कि ईरान परमाणु बम बनाने की स्थिति में है अथवा नहीं! परमाणु विज्ञानी मानते हैं कि ईरान के पास इतना सवंर्धित यूरेनियम है कि वह एक सप्ताह में ही करीब 10 छोटे परमाणु बम बना सकता है! ऐसे बम भी हिरोशिमा-नागासाकी जैसे विध्वंसक, संहारक बम होते हैं। राजनयिकों और रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जिस दिन ईरान ने छोटे परमाणु बम भी बना लिए, उसी दिन से इजरायल के अस्तित्व की उलटी गिनती शुरू हो जाएगी। कुछ विशेषज्ञों का तो यहां तक दावा और विश्लेषण है कि राष्ट्रपति टं्रप युद्ध के चक्रव्यूह में इतना फंस चुके हैं और गहरे तनाव की स्थिति में बताए जाते हैं, लिहाजा वह किसी भी दिन, किसी भी पल, ईरान पर टेक्टिकल परमाणु हमले का आदेश दे सकते हैं। कितना विनाश, कितनी तबाही होगी! लाशों के अंबार लग जाएंगे! समंदर का पानी विषाक्त हो जाएगा! तेेल के कुएं बर्बाद हो जाएंगे! क्या टं्रप की सनक और जिद इस पराकाष्ठा तक भी पहुंच सकती है? हमें तो कमोबेश ऐसा आभास नहीं होता। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) भी संयुक्त राष्ट्र तक गई है, क्योंकि वह ईरान की परमाणु गतिविधियों का यथार्थ जानने में अक्षम और असमर्थ है, क्योंकि ईरान ने उसके निरीक्षण, जांच-पड़ताल को नकार दिया है। यह तभी हो गया था, जब 2025 में अमरीकी बॉम्बर ने बंकर फोड़ू बमों से उसके परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे। आईएईए और खुफिया रपटों के मुताबिक, इसके पुख्ता सबूत नहीं हैं कि ईरान के पास वर्तमान में, पूरी तरह से तैयार, परमाणु बम है या उसका हथियारबंद डिजाइन है। उपग्रह की तस्वीरों से संकेत मिले हैं कि ईरान भूमिगत ठिकानों (पिकएक्स माउंटेन क्षेत्र) में अपने बुनियादी ढांचे का विस्तार कर रहा है, जिससे पश्चिमी देशों और विशेषज्ञों की चिंताएं बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान राजनीतिक निर्णय लेता है, तो वह बहुत कम समय (कुछ हफ्तों या महीने भर) में परमाणु हथियार के लिए आवश्यक विखंडनीय सामग्री तैयार कर सकता है। बहरहाल अभी तक सब कुछ अटकलें ही लगता है। ईरान परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) का सदस्य है। यदि वह परमाणु बम बनाने के करीब है, तो जाहिर है कि वह इस संधि से बाहर भी आएगा। ब्रिक्स घोषणा-पत्र में परमाणु खतरे और संघर्ष के जोखिमों को भी शामिल किया गया है। क्या यह दस्तावेज सार्थक होगा? टं्रप इसे क्यों मानेंगे? वैश्विक आर्थिकी को इस वक्त जो नुकसान झेलना पड़ रहा है, उसकी क्षतिपूर्ति में वर्षों का समय लगेगा। कई देशों में अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। लोगों को कमाई करना मुश्किल हो गया है। खाड़ी देशों में जो भारतीय काम कर रहे थे, उनके सामने भी रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। ऐसी स्थिति में बेहतर यही होगा कि इस लड़ाई को जल्द से जल्द रोका जाए तथा ईरान-अमरीका व रूस-यूक्रेन, दोनों युद्धों की समाप्ति की घोषणा हो।

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