चंपत राय ने फोड़ा लेटर बम, अनिल मिश्रा तो फंसे ही, SBI के बैंक मैनेजर गोविंद मिश्रा को भी लपेटा

अयोध्याः श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान पेटी की चोरी के मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा पर पुलिस और एसआईटी का शिकंजा कसने की संभावना है. एसआईटी ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है. सूत्र बताते हैं कि अनिल मिश्रा के बारे में एसआईटी को कई मजबूत एविडेंस मिले हैं. एसआईटी की जांच में 5 ऐसे इंपोर्टेंट फैक्ट सामने आए हैं, जिनके कारण दान चोरी के इस बड़े मामले में शक की सुई ट्रस्ट के पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा की तरफ जा रही है. सूत्र ये भी बताते हैं कि अयोध्या पुलिस जल्द अनिल मिश्रा को आरोपी बना सकती है. हालांकि इस बारे में अभी कोई भी पुलिस अधिकारी खुल कर नहीं बोल रहे हैं.
दान चोरी के लिए कैसे जिम्मेदार हैं अनिल मिश्रा?
आपको बता दे की एसआईटी की रिपोर्ट में दान को एकत्रित करने, उसकी काउंटिंग करने और उसे बैंक में जमा करने में जिन गड़बड़ियों की ओर इशारा किया है, उसके लिए अनिल मिश्रा ही जिम्मेदार नजर आ रहे हैं. एसआईटी की जांच में पता चला है कि अनिल मिश्रा मंदिर के वित्तीय मामलों और नकद राशि के संकलन के प्रबंधन कार्य की देखरेख करते थे. मंदिर में दान की गणना की प्रक्रिया को तय नियमों के अनुसार कराने की जिम्मेदारी अनिल मिश्रा की ही थी. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ मिलकर दान की गणना के जो नियम तय किए गए थे, उसमें ट्रस्ट की ओर से प्रतिनिधि अनिल मिश्रा थे. गणना प्रक्रिया की पुख्ता व्यवस्था बनाए रखने की पूरी जिम्मेदारी अनिल मिश्रा की थी.
चंपत राय का बयान सोशल मीडिया पर हुआ वायरल
कहा जा रहा है की दान काउंटिंग करने वाले कर्मचारियों की ड्रेस, बायोमीट्रिक अटेंडेंस और उनकी तलाशी वगैरह के लिए बनाए गए नियम अनिल मिश्रा ने ही शिथिल कर दिए थे. चर्चा तो इस बात की भी है कि गणना केंद्र से दान की चोरी हो रही थी तो यह संभव नहीं था कि यह अनिल मिश्रा की जानकारी में न हो. इन सबके अलावा श्री राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का एसआईटी को दिए गए बयान की कॉपी सोशल मीडिया पर वायरल है.
बैंक की नियुक्तियों पर भी चंपत राय का सवाल
इसके चंपत रायत ने एसआईटी के अपने पत्र के जरिए जानकारी देते हुए बताया कि बैंक ने गणना के लिए जिन युवकों का चयन किया, उन्हें हाउसकीपिंग स्टाफ के रूप में रखा है. क्या यह उचित है. मेरे विचार से कदापि नहीं. इसी कारण मेरा विचार है कि बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों को शायद कुछ भी पता नहीं है. बता दें कि इससे पहले चंपत राय ने अपना बयान सोशल मीडिया पर जारी किया था और कहा था की एसआईटी जांच पूरी होने के बाद वो पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देंगे.




